लेखनी मिलन -13-Mar-2023
रुनझुन रुनझुन आई परी इक, मेरे गम के लोक रे
उसके सोम्य स्वभाव से सारे, पल में भागे शोक रे
गम की बस्ती झूम रही है, खुशियों की फुलवारी है
अब जर्रा- जर्रा वृंदावन है, वो राधा सी ही प्यारी है
मैं खिल उठा हूँ चहक रहा हूँ महक रहा हूँ बातों से
मंहगाई के दौर में मुझको जॉब मिली सरकारी है
उसके बस संग होने से ही, हर मुश्किल को रोक रे
उसके सौम्य स्वभाव से सारे, पल में भागे शोक रे
उसका संग लगता है मानो बच्चों को चूरन पूड़ियाँ
जब भी तान छेड़ती है तो लगती सुबह की चिड़ियाँ
रति, रंभा, उर्वसी, लजाये वो चंद्र कला सी प्यारी है
नख से लेकर सिख तक है वो कवि कल्पित गुड़ियाँ
उसकी हर इक मर्जी मेरी है उसको न कोई रोक रे
उसके सौम्य स्वभाव से सारे, पल में भागे शोक रे
बात बात में गुस्सा होती है बात बात में है मुस्काती
कोयल, बुलबुल की तरह सौम्य सरस है वो गाती
बातों से ले हम दोनों के क्रिया कर्म भी एक है
वो चमकीली मैं स्याह हूँ हम दोनों दीपक बाती
एक जैसे है फिर भी रुके न अपनी नोक झोंक रे
उसके सौम्य स्वभाव से सारे, पल में भागे शोक रे
ऋषभ तोमर
पृथ्वी सिंह बेनीवाल
13-Mar-2023 07:39 PM
शानदार
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Varsha_Upadhyay
13-Mar-2023 06:20 PM
बेहतरीन
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Renu
13-Mar-2023 06:12 PM
वाह 👏👏
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